परिवार सुधारें, जीवन संवारें : मनीष सागरजी महाराज गृहस्थ जीवन पाप नहीं, पुण्य का प्लेटफार्म है

रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में रविवार को विशेष प्रवचनमाला में उपाध्याय मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि परिवार को आदर्श बनाने के लिए पहले स्वयं को सुधारना होगा। उन्होंने कहा कि धर्म किसी पर थोपें नहीं, बल्कि प्रेमपूर्वक समझाएं।

महाराजश्री ने कहा कि गृहस्थ जीवन साधना का माध्यम है। इसमें संयम, नियम और जागरूकता जरूरी है। यदि आप बेहतर बनेंगे तो बच्चे भी अच्छे बनेंगे।

उन्होंने कहा कि परिवार में कलह, अशांति और अव्यवस्था दूर करनी है तो दिनचर्या में अनुशासन और भक्ति लाएं। सूर्य उदय से पहले उठें, घर के मंदिर में सामूहिक प्रार्थना करें, छोटे-बड़े सभी धर्म के छह कर्तव्यों—पूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप और दान का पालन करें।

उन्होंने कहा कि परिवार को विकास का आधार बनाएं। संबंध मजबूत होंगे तो जीवन सफल होगा। धर्म से जुड़ें, गुरु से मार्गदर्शन लें और अपने जीवन को साधना का पथ बनाएं।