रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में चातुर्मासिक प्रवचनमाला के दौरान उपाध्याय मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि संयमित जीवन ही सुख और सुरक्षा का मार्ग है। जब तक व्यक्ति सीमाओं में रहेगा, तब तक वह सुरक्षित और आनंदित रहेगा। असंयम से तात्कालिक लाभ तो मिल सकता है, लेकिन दीर्घकालिक पीड़ा तय है।
उन्होंने कहा कि संयम को बंधन मानना हमारी सबसे बड़ी भूल है। संयम को जीवनशैली बना लेंगे तो दिनचर्या भी सरल और अनुशासित हो जाएगी। पति-पत्नी दोनों को मन, वचन और काया में संयम जरूरी है, तभी गृहस्थ जीवन सुखमय रहेगा।
महाराजश्री ने दान धर्म को सबसे सरल और प्रभावी धर्म बताया। उन्होंने पशुओं के प्रति करुणा और दया भाव रखने की प्रेरणा दी। कहा कि जब हम दूसरों के दुःख को महसूस करते हैं, तब वैराग्य और अनासक्ति का भाव स्वतः जागृत होता है।

