स्वदेशी कोयले से स्टील उत्पादन में क्रांति, जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास

जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई

रायपुर , 6 अप्रैल, 2026: जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से ‘स्वदेशी’ कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।
जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है।
प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।

रायपुर, 6 अप्रैल। जिन्दल स्टील ने कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए स्वदेशी कोयले से सिनगैस बनाकर स्टील उत्पादन में नई उपलब्धि हासिल की है। इस पहल से आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ कम कार्बन उत्सर्जन वाला सस्टेनेबल स्टील तैयार हो रहा है।
कंपनी ने पहली बार सिनगैस का उपयोग डीआरआई उत्पादन, गैल्वनाइजिंग-कलर कोटिंग भट्टियों और ब्लास्ट फर्नेस में सफलतापूर्वक किया है। इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने के साथ उत्पादन लागत में भी कमी आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोयला गैसीफिकेशन और CCUS तकनीक का संयुक्त उपयोग भारत को वैश्विक मानकों पर प्रतिस्पर्धी बनाते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।