सत्य को जानें, मानें और अपनाएं : मनीष सागरजी महाराज

रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचनमाला में उपाध्याय प्रवर मनीष सागरजी महाराज ने सत्य को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल सत्य को जानना और मानना पर्याप्त नहीं, उसे जीवन में उतारना भी जरूरी है।
महाराजश्री ने कहा कि सम्यक्त्व व्रत सत्य के प्रति निष्ठा का प्रतीक है। 13 व्रतों को धारण कर जीवन में भाव और द्रव्य शुद्धि लानी चाहिए। तत्वचिंतन से भीतर का विकास होता है, जिससे आत्मबोध होता है और कर्मबंधन से मुक्ति मिलती है।
उन्होंने श्रद्धा को धर्म, देव और गुरु से जुड़ने का माध्यम बताया। श्रद्धा से ही जीवन में नियमों का पालन संभव है। अहिंसा को प्रथम अणुव्रत बताते हुए उन्होंने कहा कि जैसे अपना जीवन मूल्यवान है, वैसे ही दूसरों का भी है — अतः हिंसा का त्याग कर अहिंसा में जीवन जीना चाहिए।